जयपुर के गोनेर कस्बे में मालपुआ मिठाई की 40 से 50 दुकानें हैं. यहां हर समय मालपुआ तैयार होते रहता है. भगवान जगदीश महाराज को भी मालपुए का भोग लगया जाता है. मालपुआ एक ऐसी अनोखी मिठाई है, जिसे तैयार करने में सबसे कम खर्च आता हैं और इसका टेस्ट सबसे शानदार होता है. गोनेर में 500 वर्षो से मालपुआ बनाने की परंपरा चली आ रही है. इसके स्वाद के लोग दीवाने हैं.
राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक किलों-महलों और प्राचीन मंदिरों के लिए ही नहीं बल्कि खास मिठाईयों के लिए भी फेमस है. जयपुर से 15 किलोमीटर दूर गोनेर कस्बे में लक्ष्मी नारायण जगदीश महाराज के दर्शन के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं. इसे राजस्थान का मिनी वृंदावन भी कहा जाता है. गोनेर अपने खास मालपुआ मिठाई के लिए भी पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है. जयपुर के जगदीश महाराज मंदिर का इतिहास 500 वर्ष पुराना है.
मंदिर के पूजारी और स्थानीय लोग बताते हैं कि मंदिर में स्थापित भगवान लक्ष्मीनारायण की यह मूर्ति एक ब्राह्मण द्वारा खेत से खोद कर निकाली गई थी और बाद में इस मूर्ति को एक छोटे से मंदिर में अनुष्ठान के साथ स्थापित किया गया. बाद में जयपुर राजपरिवार और अन्य भक्तों की मदद से भव्य मंदिर का निर्माण किया गया.
हर मंदिर की अपनी एक विशेष मान्यता होती हैं, ऐसे ही इस मंदिर की भी अनोखी मान्यता है. मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की सच्चे मन से मांगी गई सारी मनोकामनाएं पूरी होती है. मंदिर में वर्षों से भगवान जगदीश महाराज को रात को साढ़े तीन किलो का राजभोग के साथ मालपुआ और दूध का भोग लागाने की परम्परा वर्षों से चली आ रही है. यहां आने वाले भक्तों का मानना है की यदि किसी पर कोई विपत्ति या बड़ा संकट आता है, तो वह जगदीश महाराज के सवामणी बोलते हैं और जब संकट खत्म हो जाता है तो गोनेर आकर जगदीश महाराज के सवामणी का आयोजन करते हैं, इसलिए यहां की मालपुरा मिठाई प्रसिद्ध है.
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